नीला आसमां पंछियों की चहक,
नदियों का शोर फूलों की महक |
तन -मन दोनों की सेहत सुधारे,
कुछ दिन कुदरत के करीब गुज़ारे||
वो स्फूर्ति मन की, चंचलता बचपन की,
भीड़ – भाड़ से दूरी,ना बंधन ना मजबूरी|
एक बार फिर बुने सपने सारे,
कुछ दिन कुदरत के करीब गुज़ारे|

नीरू शर्मा – उत्तराखंड की एक आवाज